बाड़मेर बारिश: थार की नगरी में सड़कों पर पानी, उमस से राहत और पारा नीचे

बाड़मेर बारिश: थार की नगरी में सड़कों पर पानी, उमस से राहत और पारा नीचे

बाड़मेर बारिश: थार की नगरी में सड़कों पर पानी, उमस से राहत और पारा नीचे

बाड़मेर. रेगिस्तान की इस नगरी में सोमवार की दोपहर तक धूप और 40.1°C की तपिश थी, शाम होते-होते बादल घिरे और तेज बौछारें पड़ीं। नतीजा—कई इलाकों में पानी भर गया, ट्रैफिक धीमा हुआ, और लोगों ने उमस से राहत की सांस ली। महीने भर से बारिश गायब थी, ऐसे में यह बाड़मेर बारिश शहर और गांव—दोनों के लिए राहत लेकर आई।

यह बदलाव एक बड़े मौसमी पैटर्न का हिस्सा है। 21 अगस्त से पूर्वी राजस्थान में बारिश की वापसी शुरू हुई थी, जिसकी नमी और बादल धीरे-धीरे पश्चिमी हिस्सों तक आ पहुंचे। बाड़मेर में भी वही सिस्टम सक्रिय हुआ और सूखे दिनों के बाद आसमान ने करवट ली।

क्यों बदला मौसम: हवा और नमी की चाल

थार मरुस्थल में बारिश अक्सर तब होती है, जब अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों दिशाओं से नमी का प्रवाह एक साथ सक्रिय हो। पिछले कुछ दिनों में मॉनसून ट्रफ दक्षिण की ओर झुकी, नमी भीतर तक घुसी और स्थानीय गर्मी से बने बादलों को ऊर्जा मिली। इसी वजह से अचानक तेज बौछारें पड़ीं और तापमान नीचे आया।

दिन का पारा 40°C के ऊपर जा रहा था, रातें भी चिपचिपी उमस से भरी थीं। बारिश के बाद जमीन ठंडी हुई, हवाएं नमी से भरी जरूर रहीं, पर लू जैसा असर टूट गया। शहर की सड़कों पर पानी जमा होने की वजह साधारण है—तेज बरसात छोटी खिड़की में हुई और ड्रेनेज सिस्टम उतनी तेजी से पानी बाहर नहीं निकाल पाया।

यह भी याद रखिए, रेगिस्तानी इलाके में मिट्टी की ऊपरी परत हार्ड-क्रस्ट बनाती है। बरसात अचानक हो, तो पानी सोखने में वक्त लगता है और वही पानी सड़कों पर बहकर निचले इलाकों में इकट्ठा हो जाता है। इसलिए थोड़ी देर की तेज बारिश भी शहरी इलाकों को अस्थायी रूप से डुबो देती है।

शहर-गांव पर असर और आगे का अनुमान

शहर-गांव पर असर और आगे का अनुमान

शहर में सबसे पहले असर ट्रैफिक पर दिखा—कुछ जगह वाहनों की रफ्तार कम हुई, दोपहिया चालकों को गड्ढों से बचते हुए निकलना पड़ा। बिजली आपूर्ति कहीं-कहीं लड़खड़ा सकती है, क्योंकि तेज हवाएं और गीली स्थितियां लाइन फॉल्ट बढ़ाती हैं। प्रशासन आमतौर पर ऐसे वक्त में पंपिंग और नाले साफ कराने की व्यवस्था बढ़ाता है, ताकि पानी जल्दी निकले।

खेती की बात करें, तो बाड़मेर के किसान इस बरसात को राहत की तरह देखेंगे। बाजरा, मूंग, मोठ और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों को मिट्टी में नमी चाहिए होती है। महीने भर की खामोशी के बाद आई बौछारें देर से बोई फसल के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। जिन खेतों में फूल या दाना बनने का चरण चल रहा है, वहां यह नमी पौधों को सहारा देगी। बस सावधानी जरूरी है—नीचे वाले खेतों में पानी भरने से जड़ों को सड़न का खतरा रहता है; ऐसे में पानी निकासी के छोटे-छोटे रास्ते खुला रखना बेहतर रहेगा।

चारा और चरागाहों के लिए भी यह बारिश मददगार है। थोड़ी-सी लगातार नमी मिल जाए, तो बियाबान में भी नई घास उग आती है। टांकों और छोटे तालाबों का जलस्तर बढ़े तो गांवों में पेयजल दबाव कम होता है।

आगे क्या? मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48–72 घंटों तक पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। कहीं-कहीं गरज और तेज हवा के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। ऐसे दौर में दिन का तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है, जबकि रातें सुहानी महसूस होंगी।

यातायात और सुरक्षा के लिए कुछ आसान सुझाव काम आएंगे:

  • जलभराव दिखे तो धीमे चलें, अज्ञात गड्ढों से बचें।
  • दोपहिया चलाते समय ब्रेकिंग दूरी बढ़ाएं, फिसलन का ध्यान रखें।
  • घर के बाहर ढलान बनाकर पानी बहाव का रास्ता खुला रखें।
  • खेतों में मेड़ छोटी-छोटी खोलियों से काटें, ताकि पानी ठहरा न रहे।
  • बिजली उपकरणों को सूखे स्थान पर रखें; खुले तारों से दूरी रखें।

यह बरसात उस लंबे सूखे ब्रेक को तोड़ती है, जिसने शहर और गांव दोनों को परेशान कर रखा था। तापमान का गिरना, हवा का ताजा होना और मिट्टी में लौटी नमी—इन तीनों का संयुक्त असर लोगों के मूड से लेकर खेत की सेहत तक दिखेगा। अगर बौछारों की यह रफ्तार दो-तीन दिन और चलती रही, तो थार की इस धरती पर देर से सही, मगर सीजन का संतुलन कुछ हद तक वापस आता दिख सकता है।

रिपोर्ट: भूपेश

एक टिप्पणी लिखें

आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *